Hielscher Ultrasonics
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नैनो-प्रोपोलिस: अल्ट्रासोनिक निष्कर्षण और आकार को नैनो स्तर तक घटाना

सोनिकेशन द्वारा तैयार नैनोप्रोपोलिस और प्रोपोलिस से भरे नैनोवाहक प्रोपोलिस की चिकित्सीय क्षमता के विकास में एक महत्वपूर्ण प्रगति हैं। अल्ट्रासोनिक विधि से प्रोपोलिस का आकार नैनो स्तर तक घटाने से फ़ॉर्मूलेशन की महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान होता है और घुलनशीलता, स्थिरता तथा जैवउपलब्धता बढ़ती है। प्रक्रिया का पैमाना बढ़ाने की क्षमता और बहुमुखी उपयोगिता सोनिकेशन को वैज्ञानिक अनुसंधान तथा व्यावसायिक अनुप्रयोगों, दोनों के लिए एक उपयोगी साधन बनाती हैं। प्रोपोलिस-आधारित नैनो-फ़ॉर्मूलेशन के लिए Hielscher सोनिकेटरों के बारे में अधिक जानें।

प्रोपोलिस के उपचारात्मक उत्पाद – नैनो प्रोपोलिस का अल्ट्रासोनिक निष्कर्षण और एनकैप्सुलेशन

उच्च गुणवत्ता वाले प्रोपोलिस अर्क कुशलतापूर्वक प्राप्त करने के लिए अल्ट्रासोनिक निष्कर्षण पसंदीदा विधि के रूप में विशिष्ट स्थान रखता है। निष्कर्षण के अलावा, सोनिकेशन नैनोप्रोपोलिस तैयार करने में भी मदद करता है। नैनोप्रोपोलिस और प्रोपोलिस से भरे नैनोवाहकों का अल्ट्रासोनिक एनकैप्सुलेशन उल्लेखनीय लाभ प्रदान करता है, जिनमें बढ़ी हुई जैवउपलब्धता, बेहतर स्थिरता और अनुप्रयोगों की विस्तृत संभावनाएँ शामिल हैं। Hielscher सोनिकेटर प्रोपोलिस की पूरी चिकित्सीय क्षमता का उपयोग करने में आपकी मदद करते हैं।

जानकारी का अनुरोध



सोनिकेशन का उपयोग प्रोपोलिस के निष्कर्षण और नैनो-प्रोपोलिस की तैयारी के लिए किया जाता है। Hielscher UP200Ht एक प्रोब-प्रकार का सोनिकेटर है, जो प्रोपोलिस के निष्कर्षण और नैनो-एनकैप्सुलेशन के लिए उपयुक्त है।

सोनिकेटर UP200Ht प्रोपोलिस के निष्कर्षण और नैनो प्रोपोलिस के एनकैप्सुलेशन के लिए

प्रोपोलिस का अल्ट्रासोनिक निष्कर्षण

अल्ट्रासोनिक निष्कर्षण, जिसे आम तौर पर सोनिकेशन कहा जाता है, प्रोपोलिस युक्त माध्यम में हलचल उत्पन्न करने के लिए उच्च तीव्रता वाली अल्ट्रासाउंड तरंगों का उपयोग करता है। यह प्रक्रिया प्रोपोलिस से जैवसक्रिय यौगिकों को विलायक में मुक्त करने में मदद करती है, जिससे विभिन्न उपचारात्मक और देखभाल उत्पादों में मिलाने के लिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित होती है। प्रमुख चरणों में शामिल हैं:

  1. प्रोपोलिस की तैयारी:
    मोम और मलबे जैसी अशुद्धियाँ हटाने के लिए कच्चे प्रोपोलिस को साफ करें।
    निष्कर्षण के लिए सतह क्षेत्र बढ़ाने हेतु प्रोपोलिस को कुचलकर या पीसकर छोटे कणों में बदलें।
  2. विलायक का चयन:
    एथेनॉल और जलीय एथेनॉल सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले विलायक हैं। हम 70% जलीय एथेनॉल की अनुशंसा करते हैं।
  3. सोनिकेशन:
    तैयार प्रोपोलिस और विलायक के मिश्रण को काँच के बीकर में रखें और अपना प्रोब-प्रकार का सोनिकेटर तैयार करें, जैसे सोनोट्रोड/प्रोब S26d14 वाला UP200Ht।
    आयाम, शक्ति, तापमान (अपघटन रोकने के लिए अधिमानतः 40°C से नीचे) और अवधि (10–30 मिनट) जैसे प्राचल निर्धारित करें। तापमान सेंसर और अपने सोनिकेटर की मेनू सेटिंग में उपलब्ध तापमान नियंत्रण का उपयोग करें।
  4. निस्यंदन और सांद्रण:
    ठोस अवशेष हटाने के लिए अर्क को छानें।
    आवश्यकता होने पर, रोटरी वाष्पित्र का उपयोग करके कम दाब पर अर्क को सांद्रित करें।
  5. भंडारण:
    ऑक्सीकरण रोकने के लिए अर्क को कम तापमान पर अंबर रंग के पात्रों में रखें।

UP400ST सोनिकेटर से प्रोपोलिस टिंचर तैयार करने के विस्तृत निर्देश यहाँ पाएँ!

प्रोब-प्रकार के सोनिकेटर UP400St का उपयोग करके प्रोपोलिस का अल्ट्रासोनिक निष्कर्षण

प्रोपोलिस का अल्ट्रासोनिक निष्कर्षण Hielscher UP400St सोनिकेटर का उपयोग करके
अध्ययन और चित्र: ©Elkhateeb et al., 2022.

नैनो-प्रोपोलिस की अल्ट्रासोनिक तैयारी

नैनोप्रोपोलिस की अल्ट्रासोनिक तैयारी में ध्वनिक कैविटेशन उत्पन्न करने के लिए उच्च तीव्रता वाली अल्ट्रासाउंड तरंगों का उपयोग किया जाता है – यह तरल माध्यम में बुलबुलों का तेज़ी से बनना और ढहना है। अल्ट्रासोनिक विधि से आकार को नैनो स्तर तक घटाने और एनकैप्सुलेशन करने की प्रक्रिया प्रोपोलिस के बड़े कणों को नैनो आकार के कणों में तोड़ती है और उन्हें लिपोसोम या ठोस लिपिड नैनोकणों जैसे नैनोवाहकों में भरती है। अल्ट्रासोनिक तैयारी के सामान्य चरणों में शामिल हैं:

  1. विलयन और मिश्रण: सक्रिय घटकों को निकालने के लिए कच्चे प्रोपोलिस को पहले एक उपयुक्त विलायक, प्रायः एथेनॉल, में घोला जाता है। फिर कणों का समूहन रोकने के लिए इस विलयन में पॉलीसॉर्बेट या लेसिथिन जैसे स्थिरीकारक या पृष्ठसक्रिय पदार्थ मिलाए जाते हैं।
  2. अल्ट्रासोनिकेशन: प्रोब या बाथ सोनिकेटर का उपयोग करके तैयार मिश्रण को अल्ट्रासोनिक तरंगों के संपर्क में लाया जाता है। कैविटेशन के दौरान उत्पन्न ऊर्जा प्रोपोलिस के कणों का आकार घटाती है, जिससे एकसमान वितरण वाला नैनो-प्रोपोलिस बनता है।
  3. शुद्धीकरण और सुखाना: प्राप्त नैनो-प्रोपोलिस को अवशिष्ट विलायक हटाने के लिए शुद्ध किया जाता है और स्थिर पाउडर रूप प्राप्त करने के लिए उसे हिम-शुष्कन या स्प्रे-शुष्कन द्वारा आगे संसाधित किया जा सकता है।
  4. एनकैप्सुलेशन (वैकल्पिक): प्रोपोलिस से भरे नैनोवाहक बनाने के लिए नैनो-प्रोपोलिस को लिपोसोम, बहुलकीय नैनोकण या ठोस लिपिड नैनोकण जैसी वितरण प्रणालियों में एनकैप्सुलेट किया जा सकता है। बेहतर जैवउपलब्धता के लिए नैनो-प्रोपोलिस को किसी नैनोवाहक (जैसे लिपोसोम, नियोसोम, ठोस लिपिड नैनोकण) में भरने की एक सरल विधि अल्ट्रासोनिक एनकैप्सुलेशन है।
कच्चे प्रोपोलिस से सूजनरोधी पदार्थों जैसे जैवसक्रिय यौगिकों के निष्कर्षण के लिए प्रोब-प्रकार का सोनिकेटर UP400St

सोनिकेटर UP400St प्रोपोलिस से जैवसक्रिय यौगिकों के निष्कर्षण और एनकैप्सुलेशन के लिए

नीचे दी गई तालिका हमारे अल्ट्रासोनिकेटरों की अनुमानित प्रसंस्करण क्षमता का संकेत देती है:

बैच आयतन प्रवाह दर अनुशंसित उपकरण
0.5 से 1.5mL n.a. VialTweeter
1 से 500mL 10 से 200mL/min UP100H
10 से 2000mL 20 से 400mL/min UP200Ht, UP400St
0.1 से 20L 0.2 से 4L/min UIP2000hdT
10 से 100L 2 से 10L/min UIP4000hdT
15 से 150L 3 से 15L/min UIP6000hdT
n.a. 10 से 100L/min UIP16000
n.a. इससे अधिक समूह में लगे UIP16000

अधिक जानकारी माँगें

प्रोपोलिस टिंचर के लिए अल्ट्रासोनिकेटरों, अनुप्रयोग संबंधी तकनीकी नोट्स और कीमतों के बारे में अतिरिक्त जानकारी का अनुरोध करने के लिए कृपया नीचे दिए गए फ़ॉर्म का उपयोग करें। हमें आपकी प्रक्रिया पर आपके साथ चर्चा करने और आपकी ज़रूरतों को पूरा करने वाला सर्वोत्तम सोनिकेटर प्रस्तुत करने में खुशी होगी!





 

प्रोपोलिस से जैवसक्रिय यौगिकों का अल्ट्रासोनिक निष्कर्षण और शुद्धीकरण: चित्र में प्रोपोलिस के निष्कर्षण के लिए प्रोब-प्रकार का अल्ट्रासोनिकेटर UP400ST, एक Büchi वैक्यूम फ़िल्टर और रोटर-वाष्पित्र दिखाए गए हैं।

प्रोपोलिस से जैवसक्रिय यौगिकों का अल्ट्रासोनिक निष्कर्षण और शुद्धीकरण: चित्र में प्रोपोलिस के निष्कर्षण के लिए प्रोब-प्रकार का अल्ट्रासोनिकेटर UP400ST, एक Büchi वैक्यूम फ़िल्टर और रोटर-वाष्पित्र दिखाए गए हैं।

Hielscher Ultrasonics क्यों चुनें?

  • उच्च दक्षता
  • अत्याधुनिक तकनीक
  • विश्वसनीयता और मज़बूती
  • समायोज्य, सटीक प्रक्रिया नियंत्रण
  • बैच और इनलाइन
  • किसी भी आयतन के लिए
  • बुद्धिमान सॉफ़्टवेयर
  • स्मार्ट सुविधाएँ (जैसे, प्रोग्राम करने की क्षमता, डेटा रिकॉर्डिंग, दूरस्थ नियंत्रण)
  • संचालन में आसान और सुरक्षित
  • कम रखरखाव
  • CIP (उपकरण को उसके स्थान पर ही साफ करना)

डिज़ाइन, विनिर्माण और परामर्श – जर्मनी में निर्मित गुणवत्ता

Hielscher अल्ट्रासोनिकेटर अपने उच्चतम गुणवत्ता और डिज़ाइन मानकों के लिए प्रसिद्ध हैं। मज़बूती और आसान संचालन हमारे अल्ट्रासोनिकेटरों को औद्योगिक संयंत्रों में सुचारु रूप से एकीकृत करने में मदद करते हैं। Hielscher अल्ट्रासोनिकेटर कठोर परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण परिवेश में आसानी से काम करते हैं।

Hielscher Ultrasonics एक ISO प्रमाणित कंपनी है और अत्याधुनिक तकनीक तथा उपयोग में सुगमता वाले उच्च प्रदर्शन के अल्ट्रासोनिकेटरों पर विशेष ज़ोर देती है। स्वाभाविक रूप से, Hielscher अल्ट्रासोनिकेटर CE के अनुरूप हैं और UL, CSA तथा RoHs की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

अल्ट्रासोनिक पायसीकरण: नैनो-प्रोपोलिस और प्रोपोलिस से भरे नैनोवाहकों की तैयारी के लिए उच्च शक्ति वाला अल्ट्रासाउंड एक विश्वसनीय और कुशल विधि है।

सोनिकेटर UP400St: सोनिकेशन द्वारा प्रोपोलिस से भरे, लंबे समय तक स्थिर रहने वाले नैनोइमल्शन विश्वसनीय रूप से बनाए जा सकते हैं।



साहित्य / संदर्भ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रोपोलिस क्या है?

प्रोपोलिस एक राल जैसा पदार्थ है, जिसे मधुमक्खियाँ पौधों के स्राव को अपने एंज़ाइमों के साथ मिलाकर बनाती हैं। इसका उपयोग छत्ते की दरारें बंद करने के लिए किया जाता है, जिससे संरचनात्मक स्थिरता और सूक्ष्मजीवों से सुरक्षा मिलती है। इसमें फ़्लेवोनॉइड और फ़ीनोलिक अम्ल जैसे जैवसक्रिय यौगिक होते हैं, जो अपने रोगाणुरोधी, सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाने जाते हैं, और इसलिए इसका उपयोग स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले उपचारात्मक पदार्थ के रूप में किया जाता है।

नैनो-प्रोपोलिस का क्या लाभ है?

नैनो-प्रोपोलिस प्रोपोलिस के सक्रिय यौगिकों की जैवउपलब्धता और स्थिरता बढ़ाता है, जिससे शरीर में उनका अवशोषण और प्रभावकारिता बेहतर होती है। इसके नैनो आकार के कण ऊतकों और कोशिकाओं में बेहतर प्रवेश कर सकते हैं, जिससे कम खुराक की आवश्यकता के साथ इसके रोगाणुरोधी, सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव अधिकतम होते हैं।

नैनो-प्रोपोलिस बनाने के लिए सर्वोत्तम वितरण प्रणालियाँ कौन-सी हैं?

नैनो-प्रोपोलिस की वितरण प्रणालियों में लिपोसोम, नैनोइमल्शन, बहुलकीय नैनोकण, ठोस लिपिड नैनोकण और हाइड्रोजेल शामिल हैं। ये प्रणालियाँ चिकित्सीय अनुप्रयोगों के लिए प्रोपोलिस जैसे जैवसक्रिय यौगिकों की स्थिरता, नियंत्रित विमोचन और जैवउपलब्धता बढ़ाती हैं। प्रोपोलिस को लिपोसोम, नैनोइमल्शन, बहुलकीय नैनोकण, ठोस लिपिड नैनोकण या हाइड्रोजेल में एनकैप्सुलेट करने के लिए सोनिकेशन पसंदीदा तकनीक है।

प्रोपोलिस कैसे तैयार किया जाता है?

प्रोपोलिस को आम तौर पर निष्कर्षण द्वारा तैयार किया जाता है, ताकि मोम और मलबे जैसी अशुद्धियाँ हटाते हुए उसके जैवसक्रिय यौगिकों को अलग किया जा सके। अल्ट्रासाउंड-सहायित निष्कर्षण प्रोपोलिस के कणों को विघटित करके निष्कर्षण दक्षता बढ़ाता है, जिससे प्राप्ति और जैवसक्रियता बेहतर होती हैं। अल्ट्रासाउंड-सहायित निष्कर्षण (UAE) के बारे में अधिक पढ़ें!
प्राप्त अर्क को औषधीय और न्यूट्रास्यूटिकल अनुप्रयोगों के लिए आगे संसाधित करके टिंचर, पाउडर, मलहम या कैप्सूल में बदला जा सकता है।


उच्च प्रदर्शन वाली अल्ट्रासोनिक तकनीक! Hielscher की उत्पाद शृंखला कॉम्पैक्ट प्रयोगशाला अल्ट्रासोनिकेटर से लेकर बेंच-टॉप इकाइयों और पूर्ण औद्योगिक अल्ट्रासोनिक प्रणालियों तक की पूरी श्रेणी को समेटती है।

Hielscher Ultrasonics उच्च प्रदर्शन वाले अल्ट्रासोनिक होमोजेनाइज़र बनाती है, जिनका आकार प्रयोगशाला स्तर से औद्योगिक स्तर तक होता है।

हमें आपकी प्रक्रिया पर चर्चा करके खुशी होगी।

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